उस दिन मैं और पापा हररोज की तरह आइसक्रीम खाने गए थे। गर्मी के दिन वैसे तो मुझे पसंद नहीं पर मुझे आइस्क्रीम रोज मिलती थी, इसी बात से मैं खुश थी।
स्टोल पर पहुंचते ही पापा ने मेरी फेवरिट आइस्क्रीम ओडर की, और उन्हें कोल आया तो वो साईड में बात करने गए। अभी मैंने आइस्क्रीम चखी भी नहीं थी, की एक छोटा लड़का आया और मेरी ड्रैस खींच के बोला, आइस्क्रीम दीलादो। मैंने उसे अपनी आइसक्रीम दे दी, वो थोड़ी ही दैर में चट् कर गया।
जब पापा आये तो मैंने दुसरी आइस्क्रीम के लिए जिद् किया। मुझे आइस्क्रीम मिल भी गई, मैं खुश थी।
आइस्क्रीम खा कर में घर जाने के लिए पापा के साथ चली, तभी मैने देखा की वो लड़का किसी और से भी आइस्क्रीम मांग रहा था। क्योंकि वो शायद मेरी तरह डिनर के बाद आइस्क्रीम नहीं डिनर में ही आइस्क्रीम खा रहा था।
यह एक सत्यघटना हैं। ये मैं शायद तीसरी या चौथी कक्षा में थी तब बनी थी, तब मुझे शायद यह भी पता नहीं था की होमलेस लोग भी होते हैं, और वो लड़का उन्हीं में से एक था।