विवाह वेदी पर किए गए
सभी शपथ,वचन तोड़कर।
जीवन के कठिन पथ पर,
चल दिए अकेला छोड़कर।
संग देखे समस्त स्वप्न,
अश्रु बनकर बहते हैं।
यादों के अनगिनत कांटे,
अंतस में हरदम चुभते हैं।
कोई नहीं समझ सकता है,
मेरी पीड़ा, हृदय वेदना।
विधि ने ऐसा त्रास दिया,
कैसे जाग्रत रखूं चेतना।
सुनी मांग,उजड़ा माथा,
दर्पण भी देख के रोता है।
मेरी पीड़ा देख दुखी हो,
मां का दिल टुकड़े होता है।
#विधवा