गुनहगार तो नहीं मानते मुझे,
फ़िक्र करते रहते है बेशुमार अपनी जान को।
तनहाई का दौर गुजारा बहुत,
पर रखा है जिंदा इश्क़ के पैमाने को।
गुस्ताखी बहुत सी की दिल से निकले लफ़्ज़ों ने,
जुठी कसमें वादे ना दे कर रहना चाहते वास्ते जुदाई को।
उम्मीद कहीं टूटती रहती खयाल से,
वफा का सिला जारी रख संभाल रखते है अपने यार को।
वक़्त के साथ रहकर बने जिंदगी के साथी है,
जो कहीं गुम हो रहे है दुनिया में मिले पिछले कई जख्म को।
होता गर दिल में जूझ कर आगे बढ़ने पर,
तो विश्वाश के साथ चल बना लेता एक नए आलम को।
गलत प्रेमी ना बड़े हर वक़्त के सफर में,
डरा डरा रहता अतीत का हर लम्हा को छुपाने को।
विश्वाश बनाया कई दौर में चुरा कर,
फिर भी ना जाने खौफ चल रहा अपने इश्क़ को छोड़ जाने को।
गिरफ्तारी का सौदा मेने खुद से किया,
फिर भी नजाने कहा पर छोड़ गया अपने हालातो को।
जुनून चढ़ गया है अब तुझे पाने में,
बस तू आ उलझनों को छोड़ सीने में उतर और बता मेरे जज्बात को।
तू हसीन ख्वाब बनी मेरी दिल की,
मौका क्यु देते हो शिकार बनाने जैसे बहाने को।
DEAR ZINDAGI 💞🌹👌