ना मुराद कह दिए इश्क़ को जीत ना पाने में,
ये जहन में आग उगली कई दास्ताँ दफना ने में।
बीते हुए पल में कहीं आज का दौर न छूट जाए रूठने मनाने में,
हो अगर कहीं छूटा हुआ कल उसे भूल, शुरू करे नए पल को आजमाने में।
इश्क़ का तोहफा तेरे दहलीज तक आ चुका है सबकुछ छोड़ कर ,
तू अपना जज्बा कायम कर हर कसर छोड़ उस पर इश्क़ की बारिश लाने में।
DEAR ZINDAGI 🤗