बे - खयाली, बेबसी, नादानी पन क्या क्या कहूं इश्क़ के पैमाने में,
हर एक दौर में लिखा है लफ़्ज़ों के जरिए कलम से इस ज़माने में।
शायरियां कहीं लिखी और कई मिटाई तेरे हुस्न - ए - रूह की,
मोहोब्बत गवाही देती रही मेरे वफाई के हर एक वक़्त में।
फिर भी ना जाने ना कम हुई तेरी यादों की गहराई के वास्ते से,
और ना में जीत सका मेरे ही बिछाई हुए दिल के जज़्बात में।
DEAR ZINDAGI 😔