लिखा मोहब्ब्त को, तो दिवाना समझा,
लिखा नफ़रत को , तो दिलजला समझा,
लिखा खुद को , तो खुदगर्ज समझा,
लिखा जिंदगी को , तो फ़लसफ़ी समझा,
लिखा ख्वाहिशो को , तो मजनू समझा,
लिखा हाल - ए - वतन को , तो जाहिल समझा,
लिखा उसूल - ए - ज़िंदगी को , तो पागल समझा,
लिखा हाल - ए - दिल को , तो विलापी समझा,
लिखा सुकून को , तो फरिश्ता समझा,
बस, यह ज़माना एक मुझे ही नहीं " समझा "।
🖤🖤🖤🖤
पागल दिवाना