तू रोना चाहे तो तुझे कांधा ना मिले
तू पूरा चाहे तो तुझे आधा ना मिले
तू ना रो शके ना सो शके ना मिल सके ना ना खो शके ना सिमट शके ना लिपट शके ना आगे बढ़े ना पलट शके ना तेरी काया रहे ना रूप मिले ना तुझे छाव मिले ना धूप मिले ना तुजपे इल्ज़ाम हो ना तू बेजुर्म रहे ना तेरी मौत हो ना तू ताउम्र रहे ना तू मिट शके ना निशा रहे ना तेरी जमीन हो ना आश्मा रहे ना तू बिक शके ना छिप शके ना तेरा कोई मोल हो ना तू टिक शके ना तू कभी केद हो ना कभी रिहाई मिले ना तेरा कोई इंसान ही ना कोई खुदाई मिले ना तू बेगुनाह हो पर सजा हर एक बात की हो तू चाह के भी ना मर शके मजबूरी तेरे हालात की हो...