उनका अंदाज़ ही यू कातिलाना था,
हम खुद को भूलकर उनके ही हो गए,
ये ना सोचा की वो हमें मिलेंगे या नही,
बस उनके इंतजार में ही जी लिए,
पर अब लगता है हमे,
मिल रहा है इंतजार का फल,
बहुत मीठा है स्वाद
उनके साथ बैठने का,
साथ मे कॉफी पीने का,
किचन में खाना बनाते हुए उन्हें देखने का,
उनकी बातों को सुनते रहने का,
और,
जिंदगी भर उनसे प्यार करते रहने का !!!
- कलम की स्याही !