सब खोए हैं अपनी दुनिया में
किसी को मेरा ध्यान नहीं है...
किताबोंमें गुम कोई कविता हूं
किसी को मेरी तलाश नहीं है...
सुनाऊं किसे अपनी तन्हाई
मेरी कोई आवाज नहीं है...
कोई मुझे ढूंढ के पढ ले
इसकी मुझे अब कोई आस नहीं है...
मैं मनाऊं भी तो किस को
यूं तो मुझसे कोई नाराज नहीं है...
एहसास दिलाऊं भी तो किसको
लिखने वाला कोई पास नहीं है...
किताबों में गुम कोई कविता हूं
किसी को मेरी तलाश नहीं है...!!