यहां सबाल बहत पर जबाब मिलती नहीं, रास्ते हर तरफ है पर पता मिले कभी कहीं । स्म्रुती धुन्दला नजर आये साफ नहीं, बास्तब यहां प्रतिछबि मगर दिखे नहीं । आशुं मुसकुरा देती है कुछ बोले नहीं, आखं सब देखती है पर रोती नहीं । जान है पास दिल समझे नहीं, सिने में कोह उठाती है आवाज कान तक पहुंचे नहीं । अबास्तब परिचय किनारे तक का पता मालुम नहीं, धोखा मिलने से दिल घायल होती रही । तभी लिखी जाती है जीन्देगी की अनोखे कहानी, अनकही अनसुनी बाते की निशानी ।
यही तो है जीन्देगी........