ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी बस रूठना और मैं मनाऊँगा तुम्हें
अपने होंठों से इश़्क का जाम कर लो
ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी तुम्हारी आगोश़ में बैठकर सुकून मिला
ज़रा मुझे अपना तुम अब गुलाम कर लो
ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी मिलते-बिछड़ते हो, ज़िन्दगी कोई खेल नहीं
खुश़ी से ज़िन्दगी को ज़रा अपने नाम कर लो
ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी तुम्हारे ख़्वाब बहुत हसीन होते हैं "आरिफ़"
ज़रा अपने चेहरे को तुम ग़ुलफाम कर लो
ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी "कोरे काग़ज़" भर लो शिकायतों से मेरी
ज़्यादा नहीं बस यही इक काम कर लो।
🌹ऐ-हुस्न-की-राजकुमारी 🌹
#आराम