इस संसार मे बाह्य आडम्बर की बहुत कीमत है। दो शरीर एक घर मे अलग हो फिर भी वह एक है ऐसा लोग सोच लेते है। दो अलग घरो में दो आत्मा एक हो उसे कोई जान नही पाता। यह केवल एक सोच है जो दिखता है उसे ही सच मान कर चलते है। परंतु सच वो होता है जो हमारे भीतर होता है। जिसे केवल हम महसूस कर पाते है। आँखों को केवल वही दिखता है जो उसे दिखाया जाता है।
-Viraj Pandya