तुम आना कभी तोड़ के
निशा के सभी आवरणों को
तुम आना कभी बांध के पायल
अपने पैरों में नंगें पाँव
मैं मिलूँगा तुम्हें गाँव के पोखर
की मुँडेर पर जागता हुआ
तुम ढ़क देना मेरी आँखों को
अपने रेशमी दुपट्टे से
औऱ सुला देना मुझे अपने
स्वप्नों की रंगबिरंगी दुनियां में