बिस्तर पर पड़े पड़े सिर्फ एक ही घटना बार बार स्मृति में घूम रही कि कोई इतनी निचताई पर कैसे उतर सकता है शायद यह बहकावे का नतीजा है तभी तो वो अपना भला बुरा कुछ नही समझते जो कुछ भी किसी ने समझा दिया बस उसी पर अंधो की तरह चलते रहते है फिर कल को वो अंगूठा दिखा गया तो रोते रहेंगे साले!