घर की विशेषता
कौन नहीं चाहता कि मेरा अच्छा घर ना हो सब चाहते हैं कि मेरा अपना सुंदर घर हो जिसमें सारी सुख सुविधाएं हों और खुशी से रह सके। मेरा घर है अच्छा घर है या बहुत बड़ी नहीं है। बात यह है कि मेरा घर अर्थात मेरा एक हंसता खेलता परिवार हो जरूरत की चीजें बड़ों का सम्मान हो बच्चो को प्यार मिले महिलाओं की इज्जत हो ऐसे घर की कामना है। आजकल की पीढ़ी ऐसी है कि बच्चों की शादी होते ही अलग हो जाते हैं बाहर रहने लगते हैं मां-बाप से अलग हो जाते हैं अलग घर बना लेते हैं बिना सोचे समझे कि जिस घर में हमारी परवरिश हुई उस घर को हम कैसे लात मार रहे हैं। घर बस घर ही नहीं होता हर एक मंदिर होता है इसमें देवी देवताओं के समान हमारे माता-पिता और पूर्वजों विराजमान है। जिनमें उनका परिश्रम संघर्ष और यादें बसी हुई है। घर का मतलब यह नहीं है कि घर बन गया जो रह रहा है वह रह रहा है वहां ना आना न जाना ऐसे घर की कोई जरूरत नहीं।
हम आज कहां है जैसे हैं जो है लेकिन जो हमारा अपना घर है वहां पर जरूर रहे बड़े बुजुर्गों की बातें सुने उन से शिक्षा लें उन्होंने अपने जीवन को कैसे बिताया कैसे संघर्ष करके आज हमें यहां तक पहुंचाया ।उसके बारे में बातें करें अपने घर को अच्छा से अच्छा बनाने की कोशिश करें जिस घर में सबका सहयोग होता है सबका प्यार बसता है वह घर नहीं ईश्वर का निवास स्थानहोता है ।अपने घर में अपने पूर्वजों की तस्वीर लगाएं उनकी पुण्यतिथि पर उनके नाम का घरके सामने एक वृक्ष लगाएं ।
एक छोटे से मंदिर का निर्माण कराएं और घर के सबसे वृद्ध व्यक्ति से उस में प्रतिदिन दीप जलवायें । इत्यादि विशेषताएं होनी चाहिए सुसज्जित संपूर्ण संस्कार से परिपूर्ण सम्मानित घर की।
जिस घर के एक एक ईंट में दे सहयोग पूरा परिवार
ऐसे घर में हरदम रहती है खुशियां अपार।
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