एक दिन में निकल पड़ी अपनी मंजिल को खोजने...
रास्ते मे एक मुसाफिर मिला जो मुज से थोड़ा आगे था..
मुजे लगा हम दोनों की मंजिल एक है...
हालांकि मुजे पता नही था कि उसकी मंजिल क्या थी...
मुजे सिर्फ लगा कि जिस ओर में जा रही हु उसी ओर वो जा रहा है...
हम दोनो चलते ही जा रहे थे वो मुज से आगे में पीछे...
अचानक वो रुक गया और वही अपना ठिकाना बना दिया...
ओर मेरी गाड़ी उसे टकरा गई हालांकि वो मेरी मंजिल नही थी..
ओर जैसे में उसे टकराई ऐसे ही मुजे भी पीछे से धका लगा...
पूछे देखा तो कुछ लोग मेरे पीछे ही कतार लगा कर खड़े थे....
तब पता चला एक ही रास्ते पे चलने से सबकी मंजिल एक नही होती...
मंजिल भी अपने रास्ते खुद बनाती है सभी के लिए...
जिसकी जो मंजिल वो अपना सही रास्ता पकड़े...
किसी को फॉलो मत करो अपना रास्ता खुद चुनो..
✍️Urmi chauhan✍️
#कतार
#पंक्ति