सफ़र की खोज में आए थे अजनबी बन कर,,,!
जहा के जहन में दो दिलों का वास्ता बन कर,,,!
नज़रों से नजरिया ले आया हर दायरा बन कर,,,!
सफ़र खत्म हुआ फिर वहा खड़े हुए शायर बन कर,,,!
फिर अंजान बने एक दूजे की नफ़रत को गवाही मान कर!
आख़िर कब तक मिलते रहते एक अरमान बन कर,,,!
DEAR ZINDAGI 🤗