आदि है , अनादि हैं वो..
प्रचण्ड हैं , मार्तन्ण्ड हैं वो..
असंख्य हैं वो , भुजण्ड है वो..
काल भी वो , महाकाल भी वो
दया का दान है वो... करूणानिधान है वो,
ज्ञान का तो सार है वो... सृष्टि का विस्तार है वो
शिव शंभू नीलकंठ हैं वो , सृष्टि का सृजन्य है वो..
अंत भी है... वो , अनंत भी है वो..
विषधर बड़ा प्रचण्ड भी वो..
महाराज दशरथ का सौभाग्य भी वो..
त्रिलोक विजयी लंकेश का धिराज भी वो..
-सुप्रभात जी🙏
-Rakesh Panday