#गति
वक़्त के दायरे पर हमेंशा हर शक्श नहीं चल पाता,
इश्क़ के पैमाने पर फिजूल महेनत नहीं समज पाता।
उसकी रूह का साया बन खुदका परिचय भुला देता,
सागर जैसी गहराई में जानबूझकर जान गवां देता।
जज्बात कायम ना होने पर कमबख्त जहा से पीछे हटवा देता,
उतर जाए इश्क़ के सफर का भूत तो खुदा का गुनहगार बना देता।
हर गति से सम्बन्धित अपने खयलो में याद करके खुदको ठुकरा देता,
और यहाँ दुनियाँ में भी वक्त के मुताबिक हर ग़म को भूला देता।
DEAR ZINDAGI 😔🌹