#भार
बहुत भार हैं कंधों पर
मात - पिता के सपनों का
भाई- बहन के अरमानों को
पूरा कर जाने का
लगा पंख ऊंची उड़ान
उड़ जाने का
खुद को जान , कर पहचान
एक आदर्श बनाने का
इस भार से दब न जाऊँ
नीरस और बेरंग न हो जाऊँ
थोड़ा सा जी लेता हूँ
बन्द कर आंख ,ले उच्छवास
फिर भार वहन कर लेता हूँ।।।।