गुटका खाकर,पीक नचाकर,केवल तू मनमानी कर
पैसा गायब,सेहत गायब,केवल तू नादानी कर
कवि बनने की सनक चढ़ी,नियमों का है ज्ञान नही
रोज सवेरे फेसबुक पर लाइक की निगरानी कर
ठेकेदारी रही तुम्हारी सड़क बनी फिर खड्डा है
बाईक फिसली ,हड्डी चटकी बैठा राम कहानी कर
पढ़ना था तब गुल्ली खेली अब केवल मजदूरी है
दारू पीकर टुन्नी भाई बोली खींचातानी कर
दो दूनी बस पांच बताना वही तेरी जो आदत है
बैठे बैठे अबे निठल्ले केवल आनाकानी कर
-राजेश ओझा