कहारो पालकी को रख अब इंतेज़ार करो,
बस रुको जाओ दो पल थोड़ा इंतज़ार करो।
मेरे बचपन के पल को सजाने दो,
बरसो से जागी हूं फिर से सो जाने दो।
मेरे इन हालातो पर अब ना कोई सवाल करो,
बस रुको जाओ दो पल थोड़ा इंतज़ार करो।
वो शहेली को आ जाने दो ,
मुझे मेरी अंगनी से मिलने दो
मेरे द्वारे में हो तुम मुझ पर ऐतबार करो
बस रुक जाओ दो पल थोड़ा इंतज़ार करो
उसे ख़बर नहीं मिली होगी,
यही कही इंतेज़ार में खड़ी होगी
अब उसे तो देखने दो ना इंकार करो
बस रुक जाओ दो पल थोड़ा इंतज़ार करो
मेरी मां को तो देखो कैसे रो रही है
उनके आंखो में मोतियों की लड़ी है
उन मोतियों एसे ना तुम बेतार करो
बस रुक जाओ दो पल थोड़ा इंतज़ार करो
ये आम का पेड़ देखो
उसके पास पेड़ बैर का है
स्वाद को लेकर मन थोड़ा विचार करो
बस रुक जाओ दो पल थोड़ा इंतज़ार करो
मेरी पनघट की ये गाली है,
थोड़ी कच्ची पर भली है।
अगर प्यास लगी हो तो जलपान करो,
बस रुक जाओ दो पल थोड़ा इंतज़ार करो।
इतनी देर ठहरे है शुक्रिया तुम्हारा ,
अब चलो यहां से एक पल ना अब रुको ,
पाषाण हो गई हूं जल्दी पथ पार करो।
अब ना रुको एक पल भी ना इंतेज़ार करो।