तुमने जब दिल से मेरा अक्स मिटाया होगा ,
याद का नक्श कोई और उभर आया होगा ।
मैंने ख़्वाबों को सजाया था जिसकी पलकों पे ,
तुम नहीं थे तो तुम्हारा कोई साया होगा ।
वो एक शख्स जो शामों से डरा रहता है ,
शायद रातों ने उसे खूब सताया होगा ।
मिरे एहसास तुम्हें छू के पलट आते हैं ,
क्या कभी तुमको सबा ने ये बताया होगा ।
अब ये खामोश सी तन्हाई दुआ लगती है ,
तेरी यादों ने कभी जिसको सजाया होगा ।