हरि बोल जय श्री कृष्ण
*अपनों के लिए.*
*चिंता हृदय में होती है.*
*शब्दों में नहीं..!*
*और अपनों के लिए.*
*गुस्सा शब्दों में होता है*
*हृदय में नहीं..!*
*बस यही एक अटूट प्रेम की परिभाषा है*
*जीवन सुखी और*
*समय अनुकूल हो।*
||शुभ प्रभात||*
।। जय सियाराम जी।।
*आपका दिन शुभ हो...*