#अमंगल
ये कुदरत का लिखा हुआ कैसे मिटा सकता हूं?
खुदा की लिखी नियति को कैसे सारेजहाँ से छुपा सकता हूं.!
वो अगर सांसे भी लेती है तो हर एक शक्श में जान जो आती है,
अगर वो मुस्कुरा जाए तो मुरज़ाया हुआ फुल खिल जाता है।
उसके कदम रखने से हर मंजर में खुशहाली आती है,
गलियों के मकान में रहकर भी उसे एक महल का सौन्दर्य होता है।
उसके अहेसास से सारा आलम भी महका जाए,
और कैसे कह दूँ में की मेरा दिन अमंगल सा होता है..!
DEAR ZINDAGI ❣️😏