कृष्णाप्रिमिका
हर शाम ये श्याम की राह तके ,
ये अंतरमन में बसी राधे।
हृदय में बसा कर ये वृंदावन ,
रासलीला राचाए संग मोहन।
मनोहर को प्रेम से ऐसे बांधे ,
ये अंतरमन में बसी राधे।
माया जिसके प्रेम की ब्रह्मचारी को लागे,
जिसका नाम लगे परमेश्वर के आगे।
प्रेम में जिसके शक्ति अपार ,
मनमोहन भी करते है जिसके विचार ।
फिर भी निरंतर ये श्याम की राह तके,
ये अंतरमन में बसी राधे।
श्रद्धा