वो मेरी ज़िंदगी में अचानक हवा के तेज झोंके की तरह आया और सबकुछ बदल दिया। ठीक वैसे ही जैसे हवा का तेज झोंका जब आता है तो पल भर में सबकुछ बदल देता है.. और फिर उतनी ही तेजी से वो चला भी गया। इस बात से बेख़बर की मैं उससे मोहब्बत करने लगी हूँ। उससे मैं पूरी तरह उलझ चुकी हुँ।
उस से बात नहीं होती मगर, मैं दिन भर उससे ही बातें करती हूँ। मन ही मन ना जाने कितनी बातें उससे पूछ चुकी हूँ, और ना जाने कितनी बातें उसको बता चुकी हूँ।
मगर सच कहूँ तो मुझे उसके बारे में कुछ नहीं पता।
वो कुछ दिनों का साथ था जिसमें बातें बहुत कम थीं, मगर जज़्बात पूरे थे।
उसका ना होकर भी होना और मेरा यूँ अधूरापन उसके होने को महसूस करा ही देता है।
कभी सोचती हूँ वो जहाँ भी होगा, मुझे अनचाहे ही शायद याद करता होगा।
मेरा ख़्याल उसके सीने पर दर्द बन उभरता होगा।
कभी उड़ता दुपट्टा देख कसमसाकर अपनी हथेली पर बंधी घड़ी को पकड़ लेता होगा।
शायद कभी वो भी मुझे अपने करीब महसूस कर धड़कनों में इज़ाफ़ा कर लेता होगा। वो भी मुस्कुराकर आईने में खुद को देख सँवर लेता होगा।
किसी के टकराने पर मुझे याद कर हँसता होता।
वो कभी तो मेरे नाम को सुनकर उलझ जाता होगा।
कभी सोचती हूँ वो जहाँ भी होगा, ज़रा मेरे जिक्र से ही बेचैन हो जाता होगा..।
शायद वो भी मुझसे मोहब्बत करता होगा।
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