कहानियाँ लिख लिख कर मिटाई हमने
ज़माने को कुछ और तस्वीर दिखाई हमने।
लोग हमसे तेरी बात पूछते रह गए।
तेरी बात किसीको न बताई हमने।
ज़िन्दगी तेरे सिवा और कुछ लगी न कभी
ये बात और है के खूब आज़माई हमने।
कभी लगा ही नही तुम बिछड़ गए थे कभी
तुम्हारे साथ यूँ तन्हाई बिताई हमने।
हर एक हर्फ़ में मेरी तुम ही बोलते हो
वो कहते है के, क्या खूब सुनाई हमने।
मेरी तकदीर में ही एक तेरा साथ नही।
पर ये उम्र तेरे साथ बिताई हमने।
कोई ये पूछता है कौन हो तुम मेरे लिए?
खुदा के ओर फिर नज़र उठाई हमने।
नगमे हैं, शिकवे हैं, किस्से हैं, बाते हैं. . .
बातें भूल जाती हैं, यादें याद आती हैं !,