।। पथारी ।।
भरतपुर नाम का सोटा सा गांव था । वहां पर भरत नाम का लड़का उनके मम्मी-पापा के पास रहेता था । उनका छोटा सा परिवार था भरत अकेला था घर में उनके भाई बहन नहीं थे । भरत पढ़ा लिखा था मगर उनको नोकरी नहीं मिला था वो अपने पापा के साथ खेतों में काम करने जाता था ।
एक बार भरत के मम्मी-पापा ने सोचा अपना भरत बड़ा हों गया है । अच्छी लड़की देख कर उसकी शादी कर देनी चाहिए । भरत के मम्मी-पापा ने रीश्तेदारो को भी कहें दिया कि मेरे भरत के लिए कोई अच्छी लड़की हो तो बताना ।
कम से कम एक सप्ताह जैसा गुज़रा होगा ए शादी की बात करते हुए और भरत का रीश्ता आ गया । लड़की पडोश के गांव के रहनेवाली थी वो सुसील सुंदर और संस्कारी थी । उसका नाम रोशनी था वो भी पढ़ी लिखी थी उसका छोटा सा भाई था उसके मम्मी पापा थे । फ़िर दोनों समाज के रीति-रिवाज से भरत और रोशनी की शादी हो गई । भरत और उनका परीवार बहुत खुश थे रोशनी से आने पर मगर कल क्या होगा वो किस को पता होता है शादी के ६,७ महीने गुज़रे होंगे और भरत बिमार हों गया । भरत को दवा कराने के लिए शहर ले गए भरत को एडमिट कीया अस्पताल में बिस दिन जैसा मगर भरत को कोई फर्क नहीं पड़ा । फ़िर डोक्टर ने बोला भरत के परीवार को आप अपने लड़के को घर ले जाईए और जीतना हो सकें उतनी सेवा करीए । रोशनी और उनके सास ससुर समझ गए कि भरत के जीने की संभावना कम है ।
फ़िर भरत को अपने घर पर ला दिया गया रोशनी ने जीतना हो सकें उतनी सेवा की अपने पति की । वो मनोमन कहेती रहेती थी मैंने कोनसा गुनाह किया है कि मेरे पति का भगवान ने ए हाल किया है । ऐसा सोचती रहेती थी रोशनी और बिमार भरत की सेवा करतीं रहेती थी । एक बार भरत ने कहा रोशनी से मैंने तुमसे शादी करके तुम्हारी जिंदगी बर्बाद किया है । ऐ सुनकर रोशनी रोने लगीं और भरत से कहेने लगी आप मेरे पति हो आप नहीं होंगे तो में जी कर क्या करुंगी में तुम्हारे साथ आउंगी । और फ़िर से भरत की सेवा में लग गई रोशनी ।
रोशनी का ऐ निस्वार्थ प्रेम देख कर भगवान को रोशनी पर रहेम आने लगा और भरत धिरे धिरे ठीक होने लगा । फ़िर भरत पहले जैसा था वैसा हों गया रोशनी से कहेने लगा तुमने मेरी बहुत ही सेवा की है मैंने बहुत अच्छे कर्म किए होंगे इसलिए तुम्हारे जैसी पत्नी मीली है मुझे ।।
ऐ कहानी काल्पनिक है इसे वास्तविक जीवन से कोई लेना देना नहीं है धन्यवाद 🙏💐
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