बंदिशे क्या है... उलझनें कया है...
कुछ तो बता दो...!
इल्तिजा क्या है...
बस आंखों से सुना दो...
कडवे पलो के किस्सो को...
दिल से भूला दो...
इन रतजगी आंखोंमें भरे...
खारे पानी को बहा दो...
चहेरे का ख़ालीपन... दिल का भारीपन...
ये कश्मकश का दौर मिटा दो...
इन अंधेरों को बेचकर...
नये उजालों को बसा लो...
इन बारीशों मे खुद को भीगा दो...
तुम्हें खुश देखकर चैन आयेगा मुझे...
बस जरा सा मुस्कुरा दो...
#ठीक -हो-जाओ