Hindi Quote in Poem by VANDANA VANI SINGH

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बचन को अगर हम रोक पाते,
आज इतना कैसे उसे याद करते,
हर जगह होती अपनी मनमानी,
अगर बचपन को फिर से जीत पाते।
बचपन..
कैसे खो गया है वो पल
काश उसे फिर से डूड़ पाते
चुरण की पुड़िया वो छोटे खिलौने,
मिटी की गुड़िया बोने बोने पाते
बचपन..
वो नानी की चोटी जो थोड़ी छोटी,
वो नानी को फिर से हम चिड़ाते,
उन से ही बार बार माग कर,
वो कुछ लेकर खुशी खरीद पाते
बचपन..
वो छत से सारे कपड़े चुराना,
उनका वो घर फिर से बना पाते।
उसी घर को सपनों से सजा कर,
थोड़ा समय वहां गुजार पाते।
बचपन..
मेरे लिए वो मम्मी का पुए बनना
मुझ से डटना उनसे दूर भाग पाते।
फिर चोरी से मा के पीछे आ जाते,
मा चिल्लाती और सीने से लगा पाती
बचपन..
स्कूल से जल्दी जल्दी आना,
खाना खाते फिर गुड़िया को सजाना।
अपनी गुड़िया के लिए कपड़ों का शुलना,
उसके कपड़ों को हम फिर से बनाते।
बचपन...
हमरी जो यादे है बचपन की,
उसकी आंखो में दिखती है,
वो मेरा दोस्त अब जो अब कहीं गुम हुआ,
अपने दोस्त को फिर से खोज पाते।
बचपन..
उसकी मुस्कुरहट वो मशुम चेहरा,
उसकी वो प्यारी गलो की लाली,
गालों की लाली लौटा कर उसे,
खुशियों को इक जहां दे पाते।
बचपन...

Vandana Singh

Hindi Poem by VANDANA VANI SINGH : 111518684
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