नदी को थोड़ा रुक जाना था, बादल को थोड़ा कम घना होना था, फूलों को होना था थोड़ा कम रंगीन, चिड़ियों की आवाजों को थोड़ा कम मनमोहक होना था, हरशृंगार को थोड़ी देर और ठहरना था डाल पर, साँझ के सूरज को रुकना था कुछ और देर!
ये सब होता बस तुम्हें करना था मुझसे थोड़ा और प्रेम...⚘