मीरां की पीड
दिल मेरा, पर गिरिधर, उसपे पुरा बस तेरा
प्रीत मेरी, पर रित तो उसपे मनमोहना, तेरी
एक छोटासा जुठ क्या कहा किसिने, बता के मूर्ती तेरी;
जन्मो जनम के लिए, मै हो गई तेरी दिवानी
न राणाजी हो सके मेरे, न मै उनकी; सदा रही पराई
मन मोहन, यह क्या बात हुई , रानी से बना दिया मुझे दासी ।
मीरां की पीड तुने न जानी, छोड़ दिया उसको बनाके दिवानी ।
अब भटके वो गली गली लेके एकतारा, गाये गीत तेरे
पुकारे तुझे गा गा कर,
"गिरिधर नागर, मीरां है तेरी दीवानी "
मीरां की पीड किसिने न जानी, बन बन भटके बिचारि ।
Armin Dutia Motashaw