जब मेरा जन्म हुआ तब कलियुग था
जब फूल खिले
बीज से वृक्ष बने,
नदियों में पानी शुद्ध था
तब भी कलियुग था।
जब प्यार किया
या जब प्यार नहीं किया,
जब मुस्कराया
या जब रोया
तब भी कलियुग था।
जब पूजा के लिए गया
या शान्ति से बैठा,
ईश्वर का नाम लिया
या ईश्वर का नाम नहीं लिया
तब भी कलियुग था।
जब बिल्ली ने रास्ता काटा
कौवा सिर पर मँडराया,
भूकम्प से धरा हिली
या बाढ़ में बहुत कुछ डूबा
तब भी कलियुग था।
**महेश रौतेला