तुम आए इस तरह जैसे कि सावन मास आया है
ये तनहा दिल झूमा ऐसे कि मेहमां खास आया है
नहीं थे तुम तो डर था ये कि आओ या न तुम आओ
अब तुम आए तो ये डर है कहीं तुम चले ना जाओ
नहीं थे तुम तो आंसू रोकते थे हर नज़ारे को
जो तुम आए खुशी के आंसू रोके हर नज़ारे को
नहीं थे तब विरह की वेदना बेहोश करती थी
जो तुम आए खुशी इतनी मुझे मदहोश करती है
समझ आता नहीं मुझको ये मेरी कैसी उलझन है
मिलन की खुशी अच्छी या विरह की वेदना अच्छी
#बेहोश