#सरल
इससे ज्यादा और मैं सरल नहीं,
कभी कभी व्यग्र हूँ; किंतु तरल नहीं।
मैं मर्यादित हूँ अपने विश्वमें।
सोच-विचार कर, मिलना,
कीचडमें भी होउ ; तो भी मैं कमल नहीं।
ना आडंबर अवलंबन,
मैं, अनुभूत जीवन।
प्रतीत नित, परंतु समर्थन नहीं !
आशाएँ, असीम - अस्थगित !
निसंदेह,- निर्मल निरंकुश
मैं प्रयत्न हूँ ; वचन नहीं....
मैं कण, हर क्षण, बसू
रजकण, जल, रणमें !
अपितु साधक हूँ, मैं सफल नहीं...
©लीना प्रतीश