By courtesy:-Mudit Makhija
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हार जीत
तोड दे ये झन्जीर और खूद को कर तु आझद,
करके दीखा कुछ ऐसा की करेंगें सब तुजको याद;
रास्ता ये होगा काफी मुश्कील,
कभी भी ना बनना तु बुझदील;
चलते चलते ना सोचना फैस्ले के बारे,
जीत निश्चित नहि शायद इस बार भी तु हारे;
रुकना नहि है, बैठना नहि है;
ईन छोटीसी तकलीफो से हडबडाना नहि है;
दुसरों को नीचे दिखाके खुद कभी ना उपर उठना,
किसी के भडकाने से तु कभी ना रुठना;
उंची रख नजर गौर से देख अपनी मंजील,
वहां तभी हि पहोंचेगा जब लगेगा तेरा दील;
झीन्दगी जीने की बस ये ही रीत है;
ये इतनी आम नहि के इसका मोल
बताने वाले सिर्फ तेरी हार-जीत है !
........मुदित माखीजा