Hindi Quote in Poem by Shital Goswami

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💠 रे बाँसुरी.....
मैं कृष्ण मन मोही,
फिर तुम उसके अधरों पर क्युँ रही।
मैं कृष्ण का संगीत बनी,
फिर तुम धुन मीठी क्युँ बनी।
मैं उसके प्यार की परिभाषा,
और तुम उसके साथ रहो सदा।
मैं ही हुँ उसका स्वर,
फिर तुम राग मे कैसे रही।

💠 सुनो राधा.....
मैं उसके अधरों पर बसती, रहती उसके साथ सदा।
राग बनकें मैं मीठी धुन बजाती सदा।
तो क्युँ इतना व्याकुल हो रही.....
रे बोलो भोली राधा।
मैं हु ईसलिये क्युँकी मैं मैं नही हुँ।
डुबी हुँ राधा रसपान मे
धुन मे सदा राधा बहे और पावन हो जाये व्रजधाम।
ईसलिये कृष्ण के अधरों पर बसती सुबह-शाम।
खुदमें इतने छेद किये पर मैं तुम सी ना हो सकी।
क्याँ रोउं मैं ईसबात पर कि.....
मैं उसके मन तक ना जा सकी।
मैं हुँ क्युँकी मुजमे तुम हो।
मैं हुँ क्युँकी मेरी धुन मे तुम हो।
राधा.....
कृष्ण ह्रदय राधा पुकार.....
तन-मन में उसके राधा समाई।
उसकी साँसों में राधा बिराजे।
मन उसका राधा-राधा गाये.....
और पलकों में राधा की छवीं समाई।
फिर क्युँ राधारानी मुजसे यूँ शब्दबाण चलाये।
-- YashKrupa
-- Shital Goswami (Krupali)

Hindi Poem by Shital Goswami : 111509507

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