"आतुरता मन की जाने रहे,
प्रभु तुम्हारी हूँ ! यह मान रहे|
भ्रम के बादल बिखराये रहे ,
लगता मुझको बिसराये रहे|
एक क्षण न तुमको याद किया,
यह न समझो , बिसराये दिया |
भूली हूँ कहाँ ,जो याद करूँ,
इच्छा हो तो ,फरियाद करूँ|
मन इच्छाओं के पार गया,
सब कुछ तुम पर ,यह हार गया |
मैं दृष्टिबोध से वंचित हूँ,
तुम दृष्टा बनकर ताक रहे|
#आतुर
-- Ruchi Dixit
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