जीवित कविता का में मृत किरदार बन गया,
जब तेरी रूह से बिछड़, कहीं धुंध मे खो गया.
तमन्नाओं का सैलाब टूटा और चाहत भी ना रही,
तेरे दर से ठोकर खा, अजनबी दुनियां में खो गया.
मुकद्दर मुझसे ऐसा नाराज़ हो जाएगा मालूम ना था,
तेरी पनाह को छोड़ में, अंधेरे की गहराई में खो गया.
अब तो इंतजार रहेगा ए मौत आंखे बिछाए पल पल,
तेरी आगोश मे मेरा सुकून, इस बात मे मै खो गया.
#मृत