आसमान ने गिराया कुछ इस कदर ,
के साथ जमीन ने भी ना दिया...
हर वक्त जिसे अपना माना ,
जब जरूरत हुई तो उसी ने मुंह मोड़ लिया..
ए खुदा क्यू दिल बनाया इस कदर,
जो पराया था उसे ही अपना बना दिया...
ये ज़िंदगी उलजी कुछ इस कदर,
कोन अपना है कोन पराया ये फर्क ही भुला दिया...