कुछ बाते हमसे नजरअंदाज क्या हुई,
आपने तो रुठके सारे रास्ते बदल दिए।
लगे नुक्सानका हम जोल खोजते हुए,
बैठे बैठे दिनभर रदयको छानते ही रहे!
था सब, वहीं का वही यादोसे सिमटके,
गवांके गुमान, बेजान रदय जांचते रहे।
तुम थी फ़िरभी यादोंका सहारा लेकर,
चिजे अंजान होकर हमे कोशती रही!
- केतन व्यास "संकेत"
#नुकसान