"ज़िन्दगी केवल जरूरत नही होती,
कभी जीकर तो देखो बिना मकसद के! ,
इस बेफिक्री मे कितना आनन्द है ,
तोड़ दो झूठ का वह आवरण !
जो तुम्हें महानता की झाड़ पर चढ़ाते है|
कभी देखो तो सही ! जिस जमीन पर खड़े हो तुम ,
एक बार चूम लो उसे ! प्रेम और स्पर्श देकर ,
बन जाओ लापरवाह ,आनन्द की जमीन पर
पैर रखकर|"
#लापरवाह