अगर चले ही गये थे मेरी जिंदगी से तो फिर वापस आये क्यूँ??
कुछ भुला दिया था कुछ भूलने की कोशिश कर रही थी
फिर से आकर सब याद दिलाया क्यूँ??
इतने साल गुजर गये मे खुदको संभालना सिख गई थी
तुमसे बात करने की आदत छूट गई थी ओर अपने दोस्तों के साथ हसना सिख गई थी
तुमने फिर से बात करने की आदत लगाई क्यूँ
तुम फिर से वापिस आये क्यूँ?
जब मे टुटके बिखर रही थी तुम किसीके साथ सिमट रहे थे
मेरी ज़िन्दगी जीने की वजह ख़तम हो गई थी ओर तुम किसीके साथ नई ज़िन्दगी की शुरुआत कर रहे थे
मुश्किल से संभाला था दिलको तुमने आकर फिर से हलचल मचाई क्यूँ? तुम वापिस आये क्यूँ??
जब सच मे मुझे तुम्हारे सहारे की ज़रूरत थी तब तुम कहा थे
जब मे तुम्हारे बिना मर मर कर जी रही थी तब तुम कहा थे
अब जब मेरे परवाह करने वाले अपने है तब तुझे मेरी परवाह हुई क्यूँ? तुम वापिस आये क्यूँ?
तुमने तो अपनी औकात दिखा दी खेल के मेरे दिल के साथ
मे तो चाहकर भी तुझे नफ़रत कर ना सकी
तुम्हारी तो फितरत मे था प्यार को खेल समझना
मे अंधी हो गई थी तेरे प्यार की पट्टी अपनी आँखों से निकाल ना सकी
जब सच्चाई सामने आ ही गई थी तो फिर से झूठ का प्यार दिखाया क्यूँ? तुम वापिस आये क्यूँ?
अगर खुश थे अपनी ज़िन्दगी मे मेरी खुशियों पर नज़र लगाई क्यूँ?
जब तुम्हे चले ही जाना था तो मेरे दिल मे अरमान जगाये क्यूँ?
तुम फिर से लौटकर आये क्यूँ? तुम वापिस आये ही क्यूँ??