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कितना भी पकड़ो फिसलता जरूर है
ये वक्त है साहब बदलता जरूर है
दुनिया में इंसान को हर चीज़ मिल जाती है
सिर्फ अपनी गलती नहीं मिलती
यही जज्बा रहा तो मुश्किलों का हल भी निकलेगा
जमीं बंजर हुई तो क्या वहीं से जल भी निकलेगा
ना हो मायूस ना घबरा अंधेरों से मेरे साथी
इन्हीं रातों के दामन से सुनहरा कल भी निकलेगा
कितना भी पकड़ो फिसलता जरूर है
ये वक्त है साहब बदलता जरूर है
- $ Veer $