पागल कौन
एक अर्द्धविक्षिप्त वृद्ध महिला मैले कुचैले कपड़े पहने किसी तरह अपने शरीर को ढके हुये सड़क पर जा रही थी। उसे देखकर बच्चे पागल पागल कहकर उसे चिढाने लगे, वह भी चिढकर विचित्र हरकतें करने लगी और बच्चों के मनोरंजन का केंद्र बन गयी। उसी समय अचानक एक लडके ने उसकी ओर पत्थर फेंका जो कि उसके माथे पर लग गया और गहरी चोट के कारण वह वही बैठकर रोने लगी उसकी ऐसी स्थिति देखकर एक बुजुर्ग दंपती उसके पास पहुँचे और उसे सहारा देकर मरहम पट्टी करके, उन्होने बच्चों से कहा कि यह तो पागल है तुम लोग तो पढ लिख रहे हो ऐसी हरकतें जिससे किसी को कष्ट पहुँचे और वह दुखी हो जाये क्या उचित है? इस महिला को चोट लग जाने से तुम्हें क्या लाभ प्राप्त हुआ ? इससे तुमने कौन सा बहादुरी का काम कर दिखाया यदि ऐसी चोट तुममें से किसी को लगती तो कितनी पीड़ा सहन करनी पड़ती?
सभी बच्चों पर उनकी इन बातों का प्रभाव पड़ा और उन्हें अपनी गलती का अहसास होकर उनके मन में करूणा का भाव जाग्रत हुआ। वे उसकी सहायता के लिये उसके पास आ गये इससे वह महिला भयभीत होकर पीछे खिसकने लगी। बुजुर्ग दंपती उसे यह आभास कराने लगे कि ये बच्चे उसे परेशान नही बल्कि उसकी मदद करने हेतु आगे आ रहे हैं। उसने इशारे से बताया कि वह बहुत भूखी है, यह देखकर बच्चे अपने घर से भोजन एवं पानी ले आये। वह भोजन करके अपनी तृप्त एवं कातर आँखों से बच्चों को ऐसे देख रही थी मानो उन्हें अंतरआत्मा से धन्यवाद दे रही हो।