सम्बन्धों में अपनापन हो, सुसम्बन्ध अपनेपन से होता है।
सम्बन्धों में कड़वाहट आने से कौन भला सुख से सोता है?
सम्बन्धों में अपनापन हो तो हँसता है और टूटने पर रोता है।
सम्बन्धों में मन हो उदार, छल कपट मुक्त हो आचार-विचार।
सम्बन्ध सहज हृदय का मिलन, सम्बन्ध से सजल होते नयन।
सम्बन्ध को स्नेह सुधा की है क्षुधा , अपनापन जो हो तो घर है वसुधा।
देर नहीं लगती सम्बन्ध को बनते बंधन, बन गए आज सम्बन्ध अनुबंध।
सम्बन्ध से समाज, संस्कृति, सभ्यता बनी, सम्बन्ध से मानव बना गुणी।
आत्मीय सम्बन्ध से सुवासित है संसार, सम्बन्ध में शक्ति है अपरंपार।
सम्बन्ध सरिता की बड़ी हो धार, अपनापन सम्बन्ध का है मूलाधार।
अपनेपन से सह लेता सब भार, सम्बन्ध में सत्यता, सात्विकता, आत्मीयता है सार।
जीवन नौका संसार सागर से होती पार, आत्मीयता से आकाश में करता विहार।
सच्चा सम्बन्ध सह जाता कष्ट, विपदा हजार, कठिन समय की सह लेता मार।
अहंकार स्नेह से स्थापित सम्बन्धों को देता मार, स्वार्थ से सम्बन्ध में आता विकार।
जड़-चेतन, पशु-पक्षी, किट-पतंग, नर-नार में अपनेपन से जुड़े होते एकतार।
सम्बन्धों में अपनापन हो तो नया सम्बन्ध लेता आकार, जीवन में होता स्फूर्ति का संचार।
सम्बन्ध में अपनापन हो, सम्बन्धों के बनने-बिखरने से जन्म लेता रचनाकार।
संबंधों को शब्दों में लेता उतार, सहृदय जन मन को युगों से देता संस्कार।
@दीपेश कामडी 'अनीस'