चांदनी में खड़े हुए,
चाँद को निहार कर
पूछ रही हूँ उससे फिर आज
ऐ चाँद बता ,
मेरा दिलवर कैसा है?
तुम तो रोज देखते हो
कभी हमें भी,
उनका अक्स दिखा
परदेस में बसा मेरा यार
रहे सलामत बस
मेरी दुआओं की शीतलता
उन पर बरसा
जब भी आयें ,
वो तेरी चांदनी के तले
उन पर मेरा ,वो प्यार लुटा
भेजती हूँ जो उनको
तेरी रौशनाई के तले
मेरे प्यार की ,तपिश से नहलाकर
उन्हें मेरा सन्देशा सुना
ऐ चाँद मेरे, तुम देखते हो न
रोज उन्हें
मैं भी तुझमें ही
उनका दीदार करती हूँ
ये बात जरा उन्हें,
कानों में बता
तेरी चांदनी में,
जब भी नहाती हूँ
तो खुद को प्रिय की
बाहों में पाती हूँ
ये बात मेरे प्रियवर को बता
ओ चाँद मेरे,तुम मेरे प्यार को,मेरे प्यार का सन्देशा पहुंचा, ऐ चाँद मेरे,
वो मेरा चाँद है
ये बात उन्हें हौले से बता।