हमको सूखे में रखकर खुद नमी में सोती जब भी बिस्तर गीला होता था ,
मुझे बताओ कोई कैसे वो आंखें गीली ही जाती हैं जिनके ममता का बंधन कभी न ढीला होता था।
मुझे बताओ कोई कैसे फटेहाल है वो सिर्फ तुम्हारी खातिर जिसके तन का वस्त्र सदा ढीला होता था।
दुख का दर्शन भी न हो उस मां को जिसके सुख का कारण सिर्फ तुम्हारा बचपन लीला होता था।
#गीला