दुर हुऐ हम उससे, कुछ हफ्तों पहले...
सोचा था जी लेंगे... जरूरत क्या है?...
उसने कहा, आइएगा हमारे घर पे कभी..
राह देखेंगे... ये नहीं कहा!!...
ना उसने इज़हार किया और ना मैंने इंतजार,
वो मेरी क्यु नहीं हैं, ये सोचकर ख़ुदको ही बदल दिया,
अब, बहुत दिनों बाद,बहुत याद आती है। पर....
मिलु कैसे... वो अजनबी से तो मिलती ही नहीं है...
काश, मैं समझ पाता...
इश्क शब्दों में नहीं आंखों में तो था...
प्यार सायद उसे नहीं, पर मुझे तो था...
😩🙏 stay close to your ♥️